Tuesday, 29 March 2022

सदर अस्पताल मुंगेर में डॉक्टरऔर हॉस्पिटल मैनेजमेंट की लापरवाही

 


सदर अस्पताल मुंगेर में डॉक्टरऔर हॉस्पिटल मैनेजमेंट की लापरवाही कोई नई बात नहीं

लेकिन मुद्दा यह है कि यह लापरवाही कब तक चलेगी?!

इसकी सत्यता की जांच के लिए *युवा राष्ट्रीय जनता दल के महानगर उपाध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी प्रफुल्ल गुप्ता* स्वयं कल शाम 5:40 में अस्पताल पहुंच 5:53 में पर्चा कटा कर डॉक्टर से मिलने पहुंचे तो पता चला 15 मिनट पहले ही डॉक्टर चले गए।

ऐसे ही एक और मामले में एक गरीब लाचार पिता का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो असहाय पिता अपनी 7 दिन की बच्ची जो अस्पताल के ही आईसीयू में उन डॉक्टरों के भरोसे छोड़े हुए हैं जो अपने स्थान पर आपको मिलेंगे ही नहीं।

इन्हे डर है कि डॉक्टरों की इस अनदेखी में जच्चा बच्चा की जिंदगी न चला जाय जो यहां आम बात है।

जब मैंने आईसीयू में उपस्थित नर्स से इस बारे में पूछताछ किया तो नर्स ने कहा कि 'आज नोडल ट्रैनिंग में है जो रोजाना आ रहे हैं" जिसका वहां उपस्थित अन्य मरीजों के परिजनों ने खंडन करते हुए कहा कि कल दिन में नौ बजे आए और आधे घण्टे बाद चले गए, रोज का यही हाल है ।

अगर हमारे मरीज का हालात सीरियस होगा तो हम गरीब लोग के पास पैसे नहीं जो प्राइवेट क्लीनिक में जाए। कल ही दो बच्चा का जान गया है। हम सब बस भगवान भरोसे है।

यहां मरीजों के लिए शौचालय है जो पूरी तरह गंदगी से भरी हुई है।

 इन सभी मामलों की शिकायत को लेकर जब मैं बच्ची के पिता एवं अन्य के साथ हॉस्पिटल अथॉरिटी बिल्डिंग पहुंचा वहां कार्यालय में उपस्थित श्री आनंद जी ने इस मामले में डीएस साहब व हॉस्पिटल मैनेजर से शिकायत करने को कहा

वहा पहुंचने पर दोनों में कोई भी अधिकारी अपने ऑफिस में उपस्थित नहीं थे।


फिलहाल मैंने बच्ची के पिता को हर संभव मदद करने का वादा किया क्योंकि इस सरकार के सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की ड्यूटी पर आशा रखना व्यर्थ है।

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